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वो होली का दिन था

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कभी कभी रास्ते में आने वाली बाधाएँ और उन बाधाओं से होने वाले बदलाव हमारे जीवन को खुशनुमा बना देते हैं। उस दिन मेरे साथ भी ऐसा हुआ जिससे मुझे ये एहसास हुआ की कभी कभी जिन्हें हम बाधाएँ समझते हैं वो हमारे लिए उपाय बन कर आती हैं। आप मेरा ये किस्सा पढ़कर समझेंगे की ये कैसे मुमकिन हो सकता है।ये मेरे उस दिन का किस्सा है जब मेरे मुहल्ले में सभी की छुट्टी थी क्योंकि उस दिन होली का त्योहार था लेकिन मेरे कॉलेज की छुट्टी नहीं थी और जब मैं तैयार होकर जाने के लिए बाहर निकला तो कुछ ऐसा हो गया की मुझे मेरे समस्या का हल भी मिल गया और वो दिन मेरे लिए एक यादगार दिन बन गया। 

वो होली का दिन था

अब उस दिन पर आता हूँ। मुझे अच्छा नहीं लग रहा था लेकिन क्या करता कॉलेज जाना भी बहुत जरुरी था और कॉलेज का स्टाफ इस मामले में बहुत ही स्ट्रिक्ट था। ऐसे ही छुट्टी नहीं ले सकता था और त्यौहार की वजह से तो बिलकुल भी नहीं। लेकिन मेरे मोहल्ले के दोस्त मुझे रंगने के तैयार थे। और मैं मौके के इंतज़ार में था की कब वो लोग इधर उधर हो जाएँ और मैं कॉलेज के लिए निकल जाऊँ। वैसे आसपास का माहौल देखकर मुझे भी मन हो रहा था होली मनाने का लेकिन क्या करूँ मजबूरी थी । जब मैं नहाने के लिए जा रहा था तभी घर के बाहर से एक दोस्त ने आवाज लगाया और होली खेलने के लिए बाहर बुलाने लगा। मेरी मम्मी ने उसे बताया की उसकी छुट्टी नहीं है और वो कॉलेज जाने के लिए तैयार हो रहा है। दोस्त ने कहा की ओमबीर भैया की भी छुट्टी नहीं है लेकिन वो भी अपने कॉलेज नहीं जा  रहे हैं। मम्मी ने कहा की इसका जाना जरुरी है इसके कॉलेज वाले लोग बहुत सख्त हैं। 

वो होली का दिन था

जब मैं बाहर निकलने के लिए तैयार हुआ तो मम्मी ने कहा की थोड़ा रुक कर जाना वो लोग आपस में कह रहे थे की कब तक बचेंगे निकलेंगे तो इस रास्ते से ही। वैसे तो मोहल्ले के ज्यादातर दोस्त उम्र में मुझसे छोटे थे और मेरी इज़्ज़त भी करते थे लेकिन कम्बख्त मेरी बात नहीं मानते थे। थोड़ी देर बाद मैंने घर से बाहर इधर उधर झाँका उन लोगों में से कोई नज़र नहीं आया। मैंने सोचा रास्ता साफ़ है निकल लेता हूँ। और अगर वो लोग मिल गए तो प्यार से अपने गालों पर थोड़ा रंग लगवा ही लूँगा उतने से क्या फर्क पड़ेगा। मैं अपना बैग लेकर और मोटरसाइकिल पर सवार होकर निकला लेकिन थोड़ी ही देर में वो सब अचानक से सामने आ गए और मुझे घेर लिया और मुझे मोटरसाइकिल रोकनी पड़ी। मैंने मुस्कुराते हुए उन सबको हैप्पी होली बोला और उनमें से एक ने कहा "हाँ हाँ हैप्पी होली ,ऐसे कैसे सुखी सुखी हैप्पी होली। " एक ने मेरा बैग ले लिया। एक ने कहा "ऐसे कैसे बच के जा रहे हो " 

वो होली का दिन था

मैंने कहा की ठीक है यार मेरे चेहरे पर लगा लो और ऐसा कहकर मैंने अपना हेलमेट और चश्मा उतार दिया। लेकिन उन लोगों ने मेरे चेहरे को छोड़कर मुझे हर जगह रंग लगा दिया और गीला कर दिया। उसके बाद मेरे चेहरे और सर को रंगो और गुलाल से ऐसा रंग दिया और मसाज कर दिया की मेरा सारा प्लान धरा का धरा रह गया। कहाँ मैं थोड़ी देर पहले नहाकर और एकदम सही से तैयार होकर कॉलेज जाने के लिए निकला था और अब मैं पूरी तरह से लुटा हुआ महसूस कर रहा था। मेरा हुलिया बिलकुल बदल चूका था। तभी मेरा दिमाग ठनका और मैंने उन सबसे कहा की अब मैं भी तुम लोगों के साथ ही होली मनाऊँगा। बस एक घंटा इंतज़ार करो मुझे ये बैग घर पर रखकर कॉलेज जाना होगा देखता हूँ इस हालत में वो मुझे छुट्टी कैसे नहीं देते। 

वो होली का दिन था

घर जाने के बाद मम्मी ने कहा की मैंने कहा था ना की वो लोग तुझे रंग लगाने वाले हैं। मैंने कहा -"अब मैं कॉलेज जा रहा हूँ , छुट्टी लेकर जल्दी आ जाऊँगा। मम्मी ने की कहा ठीक है संभलकर जाना। मैंने कहा -"हाँ मैं आ जाऊंगा जल्दी। "  

उसके बाद मैं मोटरसाइकिल पर सवार होकर रंगों और गुलाल वाले माहौल से निकलते हुए अपने कॉलेज के लिये शहर की ओर निकल पड़ा। लेकिन शहर में होली का कोई असर नहीं दिख रहा था। शहर की दुनिया रोज की तरह ही चल रही थी। ऐसा लग रहा था उस दिन उस शहर की ब्लैक एंड वाइट दुनिया में मैं अकेला रंगीला इंसान घूम रहा हूँ। 

वो होली का दिन था

जब मैं कॉलेज पहुँचा सब मेरे इस बदले हुए रंग रूप को हैरानी से देख रहे थे। मैं अभी क्लास में जाकर बैठा ही था की प्रिंसिपल ऑफिस से बुलावा आ गया। जब मैं प्रिंसिपल ऑफिस में गया तो उस समय प्रिंसिपल सर और कुछ प्रोफेसर मेरे इंतज़ार  में बैठे हुए थे। मुझे देखकर सब खुश थे और सबके चेहरे पर मुस्कुराहट थी। प्रिंसिपल सर ने मुझे बड़े प्यार से बैठाया और मेरे बदले हुए हुलिए के बारे में पूछा फिर मैंने उनको बताया की कैसे मैंने कॉलेज आने के लिए अपनी तरफ से पूरी कोशिश किया और कैसे मेरे दोस्तों ने मुझे घेर लिया और प्यार से लेकिन जबरदस्ती रंग दिया। उन लोगों को भी मेरा हुलिया देखकर और उसके पीछे की वजह जानकर मज़ा आ रहा था ये मुझे उनके चेहरे की खुशी बता रही थी। प्रिंसिपल सर ने मुझे प्यार से समझाया की देखो बेटा यहाँ रंगपंचमी मनाई जाती है जो की एक हफ्ते के बाद है इसलिए अभी छुट्टी नहीं दे पाए। मैंने कहा "हाँ सर ,मैंने भी ये बात गौर किया मैं अभी जहाँ पर रहता हूँ वहां धूमधाम से होली मनाई जा रही है और जैसे ही मैं कॉलेज के लिए इधर आया तो यहाँ ऐसा कुछ भी नहीं है। फिर सर ने कहा की ठीक है अब आप आज की छुट्टी ले लो और होली का आनंद उठाओ। मैं भी सबको धन्यवाद और होली की शुभकामनायें देकर निकल पड़ा घर जाने के लिए।

नीचे उतरने की लिए जैसे ही सीढ़ियों के पास पहुँचा मेरी क्लास में से कुछ लड़कियों की आवाज आयी जो की मुझे क्लास में बुला रही थी। शायद उनलोगों को मेरे साथ सेल्फी लेना होगा। लेकिन मेरे पास इतना समय कहाँ था मुझे वापस लम्बी दुरी तय करके घर भी जाना था और दोस्तों के साथ होली भी मनाना था। वैसे भी बड़ी मुश्किल से छुट्टी मिली थी। मैं निकल पड़ा घर की ओर।

वो होली का दिन था

रास्ते में याद आया की अपने एक दोस्त से मिलता चलूँ जो एक स्टॉप पर मेरा इंतज़ार कर रहा होगा क्योंकि वो और मैं एक साथ कॉलेज आते जाते थे। और वो स्टॉप कुछ देर में रास्ते में ही पड़ेगा। मैंने अपने उस दोस्त के पास जाकर मोटरसाइकिल खड़ा किया और हेलमेट उतारा पहले तो वो मुझे पहचान नहीं पाया और पहचनाने के बाद वो हँसने लगा और फिर मैंने उससे सारा किस्सा बताया और अलविदा लेकर निकल पड़ा घर की ओर। वैसे मेरा वो दोस्त मेरे मजहब का नहीं था और ना ही वो इस तरह के कोई त्योहार मनाता था लेकिन मेरे इस किस्से को सुनकर और हुलिए को देखकर उसे भी बहुत मज़ा आया और खुशी भी हुई। इस तरह से उस दिन मुझे बिना किसी का दिल दुखाये और प्यार से होली के लिए छुट्टी मिल गयी। 

मेरे इस किस्से को जानने के बाद अब आप समझ ही गए होंगे की कभी कभी रास्ते में आने वाली बाधाएँ और उन बाधाओं से होने वाले बदलाव हमारे जीवन को खुशनुमा बना देते हैं।

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