Skip to main content

आज की सुबह भाग -२ नियम तोड़ना भी जरुरी है

पिछले भाग में आपने पढ़ा की कैसे सुबह उठने के बाद और दौड़ने के लिए जाने से पहले बदले हुए मौसम को देखकर मुझे एहसास हुआ की अकसर हमारे सामने ऐसे हालात होते हैं जिसमें हमारे पास दो या दो से अधिक काम होते हैं और हमारे लिए सभी महत्वपूर्ण होते हैं लेकिन हमें सोच समझकर और आकलन करके ये तय करना होता है की किसको कितना महत्व देना चाहिए और हालात के अनुसार सभी कामों को कैसे निपटाना चाहिए। ये भी तय करना पड़ सकता है की कौन से काम को कुछ समय तक नहीं करना है। और कौन से काम का होना ज्यादा जरुरी हैं। 

अब जानिए आगे क्या हुआ। हम तीनो निकल पड़े जंगलों और पहाड़ों की ओर टहलने ,दौड़ने और कसरत करने के लिए। जंगल की तरफ जाने से पहले हमे लगभग दो किलोमीटर पक्की रोड पर टहलते हुए जाना पड़ता है। हम पेड़ पौधों ,पास की नदी को निहारते हुए और आपस में कुछ इधर उधर की बातें करते हुए और थोड़ा हँसी मजाक करते हुए हम कच्चे रास्ते पर पहुंचे जो की जंगल के करीब ही है। 

आज की सुबह भाग -२  नियम तोड़ना भी जरुरी है

मैं सुबह की ताज़ी हवा को महसूस करते हुए थोड़ा आगे निकल गया तो एक मित्र ने पीछे से मजाक में कहा की देखो हमारे सेनापति आगे चल रहे हैं। ये सुनकर मैं पीछे आ गया और साथ में चलते हुए बोला की ऐसी बात नहीं है। हम सब बराबर हैं। वैसे ये अकसर होता है की टहलने के दौरान मैं खुद में खोया हुआ थोड़ा आगे निकल जाता हूँ और फिर सुनने में आता है की देखो हमारे सेनापति आगे चल रहे हैं। और मैं फिर से पीछे आ जाता हूँ और कहता हूँ की हम सब बराबर हैं। 

थोड़ी ही देर बाद जंगल में पहुंच कर और वो जगह के पास जाते हुए जहाँ हमे दौड़ना और कसरत करना था। हवा को महसूस करते हुए मैंने कहा की आज क्या मस्त हवा चल रही है।आज का मौसम बहुत अच्छा है। चलो आज इस मौसम का आनंद लेते हैं। चलो आज उन पहाड़ों पर दूर तक घूमते हैं। शायद उन दोनों मित्रों के मन में भी यही चल रहा था। उनमें से एक ने जो की मुझसे उम्र में बड़े हैं ने कहा की हाँ चलो उस पहाड़ पर चलते हैं। दूसरे मित्र ने भी जो की मुझसे उम्र में छोटा है ने भी कहा की चलो चलते हैं मौसम का आनंद लेते हैं। मैंने कहा हाँ दौड़ना और कसरत तो चलता रहेगा। 

आज की सुबह भाग -२  नियम तोड़ना भी जरुरी है

वैसे तो ये हमारा रोज का नियम है की लगभग दो किलोमीटर तक पैदल चलना ,उसके बाद वार्मअप करना और अपने सामर्थ्य अनुसार दौड़ लगाना ,कसरत करना और घर जाने के बाद अपने अपने कामों और जिम्मेदारियों में व्यस्त हो जाना। और इस नियम का हम सख्ती से पालन करते हैं। लेकिन हमेशा नियमों में बंधना जिंदगी को बोर बना देता है। कभी कभी सामने के हालात को देखते हुए नियम तोड़ना या थोड़ा बदलाव भी जीवन में आनंद ला देता है। इसलिए हमने भी बदलाव कर दिए अपने आज की सुबह के नियम में और बदले हुए मौसम का ,ठंडी ठंडी हवाओं का ,बिलकुल हलकी हलकी बारिश की बूँदों का और हरियाली का आनंद लेते हुए हम आपस में बातें करते हुए आगे चल पड़े। और हाँ ये बात हर किसी की जीवन में मायने रखती है चाहे आप किसी भी क्षेत्र में काम करते हों। मौसम का आनंद लेते हुए भी हमने लगभग उतना ही कसरत कर लिया और पसीना बहा लिया जितना की रोज बहाते हैं। 

आज की सुबह भाग -२  नियम तोड़ना भी जरुरी है

आगे क्या क्या हुआ जानने के लिए कृपया अगले भाग का इंतज़ार करें। जिसको पढ़ने के बाद आपको अच्छा महसूस होने के साथ जीवन के कुछ महत्वपूर्ण बातों की जानकारी भी मिलेगी। 

Click for English version

कृपया ये भी पढ़ें -

आज की सुबह भाग -३ भगवान,विश्वास और सकारात्मक ऊर्जा

आज की सुबह भाग -१

Comments

Post a Comment

Popular posts from this blog

वह दिन - एक सच्चा अनुभव

 सुनें 👇 उस दिन मेरे भाई ने दुकान से फ़ोन किया की वह अपना बैग घर में भूल गया है ,जल्दी से वह बैग दुकान पहुँचा दो । मैं उसका बैग लेकर घर से मोटरसाईकल पर दुकान की तरफ निकला। अभी आधी दुरी भी पार नहीं हुआ था की मोटरसाइकल की गति अपने आप धीरे होने लगी और  थोड़ी देर में मोटरसाइकिल बंद हो गयी। मैंने चेक किया तो पाया की मोटरसाइकल का पेट्रोल ख़त्म हो गया है। मैंने सोचा ये कैसे हो गया ! अभी कल तो ज्यादा पेट्रोल था ,किसी ने निकाल लिया क्या ! या फिर किसी ने इसका बहुत ज्यादा इस्तेमाल किया होगा। मुझे एक बार घर से निकलते समय देख लेना चाहिए था। अब क्या करूँ ? मेरे साथ ही ऐसा क्यों होता है ?  मोटरसाइकिल चलाना  ऐसे समय पर भगवान की याद आ ही जाती है। मैंने भी मन ही मन भगवान को याद किया और कहा हे भगवान कैसे भी ये मोटरसाइकल चालू हो जाये और मैं पेट्रोल पंप तक पहुँच जाऊँ। भगवान से ऐसे प्रार्थना करने के बाद मैंने मोटरसाइकिल को किक मार कर चालू करने की बहुत कोशिश किया लेकिन मोटरसाइकल चालू नहीं हुई। और फिर मैंने ये मान लिया की पेट्रोल ख़त्म हो चूका है मोटरसाइकल ऐसे नहीं चलने वाली।  आखिर मुझे चलना तो है ही क्योंकि पेट

व्यवहारिक जीवन और शिक्षा

सुनें 👇 एक दिन दोपहर को अपने काम से थोड़ा ब्रेक लेकर जब मैं अपनी छत की गैलरी में टहल रहा था और धुप सेंक रहा था। अब क्या है की उस दिन ठंडी ज्यादा महसूस हो रही थी। तभी मेरी नज़र आसमान में उड़ती दो पतंगों पर पड़ी। उन पतंगों को देखकर अच्छा लग रहा था। उन पतंगों को देखकर मैं सोच रहा था ,कभी मैं भी जब बच्चा था और गांव में था तो मैं पतंग उड़ाने का शौकीन था। मैंने बहुत पतंगे उड़ाई हैं कभी खरीदकर तो कभी अख़बार से बनाकर। पता नहीं अब वैसे पतंग  उड़ा पाऊँगा की नहीं। गैलरी में खड़ा होना    पतंगों को उड़ते देखते हुए यही सब सोच रहा था। तभी मेरे किराये में रहने वाली एक महिला आयी हाथ में कुछ लेकर कपडे से ढके हुए और मम्मी के बारे में पूछा तो मैंने बताया नीचे होंगी रसोई में। वो नीचे चली गयी और मैं फिर से उन पतंगों की तरफ देखने लगा। मैंने देखा एक पतंग कट गयी और हवा में आज़ाद कहीं गिरने लगी। अगर अभी मैं बच्चा होता तो वो पतंग लूटने के लिए दौड़ पड़ता। उस कटी हुई पतंग को गिरते हुए देखते हुए मुझे अपने बचपन की वो शाम याद आ गई। हाथ में पतंग  मैं अपने गांव के घर के दो तले पर से पतंग उड़ा रहा था वो भी सिलाई वाली रील से। मैंने प

अनुभव पत्र

सुनें 👉 आज मैं बहुत दिनों बाद अपने ऑफिस गया लगभग एक साल बाद इस उम्मीद में की आज मुझे मेरा एक्सपीरियंस लेटर मिल जाएगा। वैसे मै ऑफिस दोबारा कभी नहीं जाना चाहता 😓लेकिन मजबूरी है 😓क्योंकि एक साल हो गए ऑफिस छोड़े हुए😎।नियम के मुताबिक ऑफिस छोड़ने के 45 दिन के बाद  मेरे ईमेल एकाउंट मे एक्सपीरियंस लेटर आ जाना चाहिए था☝। आखिर जिंदगी के पाँच साल उस ऑफिस में दिए हैं एक्सपीरियंस लेटर तो लेना ही चाहिए। मेरा काम वैसे तो सिर्फ 10 मिनट का है लेकिन देखता हूँ कितना समय लगता है😕।  समय  फिर याद आया कुणाल को तो बताना ही भूल गया😥। हमने तय किया था की एक्सपीरियंस लेटर लेने हम साथ में जायेंगे😇  सोचा चलो कोई बात नहीं ऑफिस पहुँच कर उसको फ़ोन कर दूंगा😑। मैं भी कौन सा ये सोच कर निकला था की ऑफिस जाना है एक्सपीरियंस लेटर लेने।आया तो दूसरे काम से था जो हुआ नहीं सोचा चलो ऑफिस में भी चल के देख लेत्ते हैं😊। आखिर आज नहीं जाऊंगा तो कभी तो जाना ही है इससे अच्छा आज ही चल लेते है👌। गाड़ी में पेट्रोल भी कम है उधर रास्ते में एटीएम भी है पैसे भी निकालने है और वापस आते वक़्त पेट्रोल भी भरा लूंगा👍।  ऑफिस जाना  पैसे निकालने