Skip to main content

What are people ignoring in the corona pandemic

scroll down for English version

कोरोना महामारी में लोग क्या अनदेखी कर रहे हैं ?

सुनें 👇

हमारे आसपास आज के समय में एक बात गौर करने लायक है। आज के लॉकडाउन के समय में लोगों का मिलना जुलना कम होता है या फिर न के बराबर होता है। और जब मिलते हैं तो एक दूसरे का हाल चाल पूछते हैं जो की होना ही है। फिर कुछ पुराने पल। फिर कुछ खास दोस्तों के बारे में बातचीत होती है। फिर शुरू होता है जो आजकल का सबसे ज्वलंत मुद्दा है वो है कोरोना का। जरुरी नहीं की जिस अनुक्रम में मैं बता रहा हूँ वैसे ही हो मुद्दे आगे पीछे भी हो सकते हैं लेकिन होते जरूर हैं। 

और बात जब कोरोना की शुरू होती है तो अपने आसपास ,अपने दोस्तों के बारे में ,अपने और उनके रिश्तेदारों के बारे में बातें शुरू हो जाती हैं की कौन कौन कोरोना के प्रभाव में आया , किसकी हालत गंभीर थी ,किसकी कोरोना की वजह से मृत्यु हो गयी इत्यादि। उसके बाद मुद्दा आता है हेल्थ इन्सुरेंस और पालिसी लेने का। और हेल्थ इन्सुरेंस और पालिसी का होना कितना जरुरी है इस बात पर जोर दिया जाता है।

इसके अलावा कहाँ कितना पैसा इन्वेस्ट करना है इन पर भी बड़े जोर शोर से बात की जाती है। उसके बाद मुद्दे आते हैं नौकरी के ,गाड़ियों के ,मोबाइल के ,सेलिब्रिटीज के ,न्यूज़ के इत्यादि। जरुरी नहीं की जिस अनुक्रम में मैं बता रहा हूँ वैसे ही हो, मुद्दे आगे पीछे भी हो सकते हैं लेकिन होते जरूर हैं।

और जो मुद्दा नज़र अंदाज किया जाता है या जिसे बहुत ही कम महत्व दिया जाता है वो मुद्दा है सही जीवनशैली का। इसके बारे में कोई बात ही नहीं की जाती है जबकि देखा जाये तो ये मुद्दा आज के समय में तो बहुत जरुरी मुद्दा है। मामला चाहे किसी कोरोना जैसी महामारी का हो या किसी और प्रकार के संकट का इसके पीछे मुख्य रूप से जिम्मेदार हमारी जीवनशैली और उसके प्रति हमारी सोच है। 

What are people ignoring in the corona pandemic
सोचने वाली बात 

जीवनशैली का मतलब सीधे शब्दों में यही हुआ की हम कैसे जीना चाहते हैं ?हम जीने के लिए क्या कर रहे हैं ? हम अपने जीवन में क्या चाहते हैं ? 

और आजकल के हालात को देखकर ये सवाल तो बनता है की हमारी जीवनशैली यानि जीवन जीने का तरीका सही है या गलत ? और सही है तो कितना सही है ?हमें कहाँ सुधार करने के जरुरत है ? यह सब हमें सोचने और समझने की जरुरत है। 

आज के दौर में कोई भी इंसान चाहे वो बहुत पैसे वाला हो ,मिडिल क्लास का हो ,गरीब हो सब पैसे ,खाना ,ताकत ,सुविधाओं के पीछे अंधाधुन भागते हैं। हम इन सब के पीछे अंधाधुन क्यों भाग रहे हैं ? क्या ऐसा करने से हमें अच्छा जीवन मिल रहा है या हम अच्छा जीवन जी पाएंगे ? ये सब चीज़ें अंधाधुन भागने के लिए नहीं हैं। उदहारण के तौर पर कहना चाहूंगा की मुझे किसी ने कहा था की हमें जीने की लिए खाना है ,खाने के लिए नहीं जीना है।   

अंधाधुन तरक्की के पीछे भागना,अंधाधुन प्रतियोगिता के कारण एक दूसरे से आगे निकलने के लिए कितनी भी हद तक कुछ भी कर जाना जैसे आजकल की मीडिया वाले टी आर पी के लिए किसी भी हद तक का तमाशा कर सकते हैं, राजनेता चुनाव जितने के लिए किसी भी हद तक राजनीतिक खेल खेल सकते हैं ,क्या आज के राजनेता वाकई आम जनता की भलाई के लिए कुछ सोचते हैं ? क्या बड़े बड़े उद्योगपति वाकई जनता और प्रकृति को ध्यान में रखते हुए अपना व्यापार करते हैं ? सच तो ये है की उन्हें सिर्फ ज्यादा से ज्यादा सम्पति बनानी है और ज्यादा से ज्यादा तरक्की करनी है। 

इनके अलावा आम जनता भी आपस में बँटी हुई है कहीं देश के नाम पर ,कहीं मजहब के नाम पर ,कहीं भाषा के नाम पर ,कहीं अमीर गरीब के नाम पर ,कहीं आपसी कलह के कारण खास तौर से विचार अलग होने के कारण इत्यादि । कुछ भी हो जाये आम आदमी हो या खास आदमी समय के साथ सबक भूल जाता है खासकर प्रकृति के बारे में।विपदा खत्म होते ही भूल जाता है की हम पर विपदा क्यों आयी थी और हमे अपने स्वार्थ के लिए प्रकृति के साथ खिलवाड़ नहीं करना है। 

हमें समझना होगा की हमें प्रकृति के नियमों से छेड़ छाड़ नहीं करना है। हम इंसानों के लिए दिन काम करने के लिए है और रात आराम करने के लिए है। जंगलों को काट कर बिल्डिंगे बनाने से हमे कोई ख़ुशी नहीं मिलने वाली। नौकरी ,पैसा और अपने स्वार्थ के पीछे अंधाधुन भागने के अच्छा है अपनी खुद की सेहत ,परिवार और मानवता के बारे में सोचा जाये। क्यों न हमारी जीवनशैली ऐसी हो जिसमे मानवता की भावना हो और किसी भी तरह से प्रकृति के साथ छेड़ छाड़ न हो। कहीं ऐसा न हो की हमारा जीवन पूरी तरह से वैक्सीन पर ही निर्भर हो जाये। 

आप भी सोचिये और समझने के कोशिश कीजिये की कोरोना महामारी में लोग किन बातों को नज़रअंदाज़ कर रहे हैं। 

English translation----------------------

One thing is worth noting in today's time around us. In today's time of lockdown, meeting people is less or less. And when they meet, they ask about each other's condition, which is bound to happen. Then some old moments. Then there is a conversation about some special friends. Then it starts, which is the most burning issue nowadays that of Corona. It is not necessary that the sequence in which I am telling is the same, the issues can go back and forth but they do happen.

And when the matter of corona starts, then talk starts about you, your friends, about yourself and their relatives, who came under the influence of corona, whose condition was serious, whose death due to corona Done . After that comes the issue of taking health insurance and policy. And it is emphasized how important it is to have health insurance and policy. 

Apart from this, where to invest how much money is also talked about loudly. After that the issues come about jobs, vehicles, mobiles, celebrities, news etc. It is not necessary that the sequence in which I am telling is the same, issues can go back and forth but they do happen.

And the issue which is ignored or which is given very little importance is the issue of right lifestyle. Nothing is talked about it, whereas if seen, this issue is a very important issue in today's time. Whether it is an epidemic like corona or any other type of crisis, the main reason behind it is our lifestyle and our thinking towards it.

What are people ignoring in the corona pandemic
thing to think about

Lifestyle simply means how we want to live? What are we doing to live? What do we want in our life?

And looking at the current situation, the question becomes whether our lifestyle means that the way of living is right or wrong? And if right then how much is right? Where do we need to improve? This is all we need to think and understand.

In today's era, any person whether he is very rich, middle class, poor, all run blindly after money, food, power, facilities. Why are we running blindly after all this? Will we be getting a good life by doing this or will we be able to live a good life? All these things are not meant to run indiscriminately. For example, I would like to say that someone told me that we have to eat to live, not live to eat.

Running after indiscriminate progress, going to any extent to get ahead of each other due to indiscriminate competition, like today's media people can do any show for TRP, politicians to win elections Political games can be played to any extent, do today's politicians really think anything for the good of the general public? Do big industrialists really do their business keeping in mind the public and nature? The truth is that they just have to make more and more wealth and progress more and more.

Apart from these, the general public is also divided among themselves, somewhere in the name of the country, somewhere in the name of religion, somewhere in the name of language, somewhere in the name of rich poor, somewhere due to mutual discord, especially because of difference of opinion etc. Be it common man or special man forgets the lesson with time, especially about nature, as soon as the calamity is over, we forget why the calamity came upon us and we do not have to play with nature for our selfishness.

We have to understand that we should not tamper with the laws of nature. For us humans, the day is for work and the night is for rest. We will not get any happiness by cutting down forests and making buildings. It is better to think about your own health, family and humanity than running blindly after job, money and your selfishness. Why should not our lifestyle be such that there is a sense of humanity and there is no tampering with nature in any way. lest our life be completely dependent on vaccine.

You too think and try to understand what people are ignoring in the corona epidemic.

Popular posts from this blog

वह दिन - एक सच्चा अनुभव

 सुनें 👇 उस दिन मेरे भाई ने दुकान से फ़ोन किया की वह अपना बैग घर में भूल गया है ,जल्दी से वह बैग दुकान पहुँचा दो । मैं उसका बैग लेकर घर से मोटरसाईकल पर दुकान की तरफ निकला। अभी आधी दुरी भी पार नहीं हुआ था की मोटरसाइकल की गति अपने आप धीरे होने लगी और  थोड़ी देर में मोटरसाइकिल बंद हो गयी। मैंने चेक किया तो पाया की मोटरसाइकल का पेट्रोल ख़त्म हो गया है। मैंने सोचा ये कैसे हो गया ! अभी कल तो ज्यादा पेट्रोल था ,किसी ने निकाल लिया क्या ! या फिर किसी ने इसका बहुत ज्यादा इस्तेमाल किया होगा। मुझे एक बार घर से निकलते समय देख लेना चाहिए था। अब क्या करूँ ? मेरे साथ ही ऐसा क्यों होता है ?  मोटरसाइकिल चलाना  ऐसे समय पर भगवान की याद आ ही जाती है। मैंने भी मन ही मन भगवान को याद किया और कहा हे भगवान कैसे भी ये मोटरसाइकल चालू हो जाये और मैं पेट्रोल पंप तक पहुँच जाऊँ। भगवान से ऐसे प्रार्थना करने के बाद मैंने मोटरसाइकिल को किक मार कर चालू करने की बहुत कोशिश किया लेकिन मोटरसाइकल चालू नहीं हुई। और फिर मैंने ये मान लिया की पेट्रोल ख़त्म हो चूका है मोटरसाइकल ऐसे नहीं चलने वाली।  आखिर मुझे चलना तो है ही क्योंकि पेट

व्यवहारिक जीवन और शिक्षा

सुनें 👇 एक दिन दोपहर को अपने काम से थोड़ा ब्रेक लेकर जब मैं अपनी छत की गैलरी में टहल रहा था और धुप सेंक रहा था। अब क्या है की उस दिन ठंडी ज्यादा महसूस हो रही थी। तभी मेरी नज़र आसमान में उड़ती दो पतंगों पर पड़ी। उन पतंगों को देखकर अच्छा लग रहा था। उन पतंगों को देखकर मैं सोच रहा था ,कभी मैं भी जब बच्चा था और गांव में था तो मैं पतंग उड़ाने का शौकीन था। मैंने बहुत पतंगे उड़ाई हैं कभी खरीदकर तो कभी अख़बार से बनाकर। पता नहीं अब वैसे पतंग  उड़ा पाऊँगा की नहीं। गैलरी में खड़ा होना    पतंगों को उड़ते देखते हुए यही सब सोच रहा था। तभी मेरे किराये में रहने वाली एक महिला आयी हाथ में कुछ लेकर कपडे से ढके हुए और मम्मी के बारे में पूछा तो मैंने बताया नीचे होंगी रसोई में। वो नीचे चली गयी और मैं फिर से उन पतंगों की तरफ देखने लगा। मैंने देखा एक पतंग कट गयी और हवा में आज़ाद कहीं गिरने लगी। अगर अभी मैं बच्चा होता तो वो पतंग लूटने के लिए दौड़ पड़ता। उस कटी हुई पतंग को गिरते हुए देखते हुए मुझे अपने बचपन की वो शाम याद आ गई। हाथ में पतंग  मैं अपने गांव के घर के दो तले पर से पतंग उड़ा रहा था वो भी सिलाई वाली रील से। मैंने प

अनुभव पत्र

सुनें 👉 आज मैं बहुत दिनों बाद अपने ऑफिस गया लगभग एक साल बाद इस उम्मीद में की आज मुझे मेरा एक्सपीरियंस लेटर मिल जाएगा। वैसे मै ऑफिस दोबारा कभी नहीं जाना चाहता 😓लेकिन मजबूरी है 😓क्योंकि एक साल हो गए ऑफिस छोड़े हुए😎।नियम के मुताबिक ऑफिस छोड़ने के 45 दिन के बाद  मेरे ईमेल एकाउंट मे एक्सपीरियंस लेटर आ जाना चाहिए था☝। आखिर जिंदगी के पाँच साल उस ऑफिस में दिए हैं एक्सपीरियंस लेटर तो लेना ही चाहिए। मेरा काम वैसे तो सिर्फ 10 मिनट का है लेकिन देखता हूँ कितना समय लगता है😕।  समय  फिर याद आया कुणाल को तो बताना ही भूल गया😥। हमने तय किया था की एक्सपीरियंस लेटर लेने हम साथ में जायेंगे😇  सोचा चलो कोई बात नहीं ऑफिस पहुँच कर उसको फ़ोन कर दूंगा😑। मैं भी कौन सा ये सोच कर निकला था की ऑफिस जाना है एक्सपीरियंस लेटर लेने।आया तो दूसरे काम से था जो हुआ नहीं सोचा चलो ऑफिस में भी चल के देख लेत्ते हैं😊। आखिर आज नहीं जाऊंगा तो कभी तो जाना ही है इससे अच्छा आज ही चल लेते है👌। गाड़ी में पेट्रोल भी कम है उधर रास्ते में एटीएम भी है पैसे भी निकालने है और वापस आते वक़्त पेट्रोल भी भरा लूंगा👍।  ऑफिस जाना  पैसे निकालने