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नींद पूरी होना क्यों जरूरी है ? मेरे अनुभव

नींद पूरी होना क्यों जरूरी है ?  मेरे अनुभव 

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सुबह की ताजगी - आज की सुबह बहुत ही ताज़गी भरी और मस्त लग रही थी। ऊपर टंकी में पानी भर रहा था। पानी चेक करने के बाद मैं छत पर ही टहलने लगा और इधर उधर देखने लगा। सुबह की ठंडी हवा ,सुहाना मौसम , छत से थोड़ी दूर खाली सड़क ,सड़क के किनारे पेड़ पौधे ,उड़ते हुए पंछी और दूर तक फैले हुए पहाड़ बहुत ही अच्छा महसूस करा रहे थे। अच्छा इसलिए भी लग रहा था की मैं करीब दो हफ्ते के बाद सुबह जल्दी उठा हूँ। करीब दो हफ्ते पहले तक मैं सुबह जल्दी उठ जाता था और योग करने के और दूर तक दौड़ने के साथ मेरे दिन की शुरु वात हो जाती थी।

नींद पूरी होना क्यों जरुरी है ?  मेरे अनुभव

लेकिन कुछ समय से नियम बदल गया है। सब कुछ उलटा हो गया है पहले रात को जल्दी सोता था और सुबह जल्दी उठता था लेकिन अब रात को देर तक जागने लगा हूँ और सुबह देर तक सोने लगा हूँ। ऐसा नहीं है की अभी भी मैं सुबह जल्दी नहीं उठ सकता। उठ सकता हूँ लेकिन मैं अपने अनुभव के आधार पर ये जान चूका हूँ की सुबह जल्दी उठने के लिए रात को जल्दी सोना और अच्छी नींद सोना जरूरी है। लगभग सात आठ घंटे की नींद भी जरूरी है स्वस्थ्य रहने के लिए और दिन भर काम को करने के लिए भी। 

अधूरी नींद और नकारात्मक परिणाम - कुछ साल पहले ऐसा था कि मैं रात को कितनी ही देर से सोऊँ सुबह जल्दी उठ जाता था और दिन की शुरु वात योग ,दौड़ और कसरत के साथ आरंभ करता था। लेकिन इसका परिणाम काफी नकारात्मक होने लगा था। मुझे दिन भर सुस्ती रहने लगी थी खासकर नाश्ता करने के बाद तो ऐसा लगता था की सो ही जाऊं लेकिन नहीं मुझे कुछ एग्जाम की तैयारी भी करनी होती थी और उसके बाद दोपहर को ऑफिस के लिए भी निकलना होता था। लेकिन कोई भी चीज़ पढ़ने और समझने के लिए भी नींद का पूरा होना और खुद को तरोताजा होना भी जरूरी है। होता ये था  की मैं नाश्ता करने के बाद जबरदस्ती जग कर पढता तो था लेकिन समझ में कुछ नहीं आता था और पढ़ाई करने के दौरान आँख बंद हो जाती थी और दो चार झपकी तो ले ही लेता था। कभी कभी नींद पूरी ना होने का गलत असर ऑफिस के काम पर भी पड़ता था। काम ठीक ना होने की वजह से कभी कभी ऑफिस में शर्मिंदगी भी झेलनी पड़ती थी।

नींद और परीक्षा की तैयारी -आधी अधूरी नींद में मुझसे उन दिनों तो क्या कभी भी कोई एग्जाम की तैयारी अच्छे से नहीं हुई। कभी कभी तो ऐसा भी हुआ है की एग्जाम की तैयारी अच्छे से हुई होती थी लेकिन दूसरे शहर में सफर करना और नींद ना पूरी होने की वजह से भी पेपर सही से नहीं दे पाता था। ऐसा लगता था की जैसे भी हो पेपर के सारे सवाल हल करो और जल्दी से पेपर देकर वापस घर चलो। पेपर देते समय वापस ले जाने वाली रेलगाड़ी की तस्वीर आँखों के सामने दिखने लगती थी ऐसा लगता था की कब पेपर खत्म होगा और कब रेलगाड़ी मैं बैठकर घर की तरफ लौटूंगा।

नींद पूरी होना क्यों जरुरी है ?  मेरे अनुभव

परीक्षा में नींद आना - कोई कोई तो पेपर के दौरान भी सो जाता था। कोई कोई तो जैसे तैसे जल्दी जल्दी पेपर खत्म करके सो जाता था।

एक बार हुआ ये था की मैं पेपर देने अपने गांव के पास के ही एक शहर में गया हुआ था। मैं एग्जाम सेंटर समय से लगभग तीन घंटे पहले ही पहुँचा था। मैंने देखा की बैठने वाली जगह पर एक लड़का सो रहा था वो भी गहरी नींद में। मैंने उसे जगाया। उसने जब आँख खोली तो उसकी आँखें लाल थी। चेहरा भी काफी निस्तेज था। मैंने उससे जब पूछा की आपकी आँखें इतनी लाल क्यों हैं। उसने बताया की वो पड़ोस के राज्य से रेलगाड़ी में सफर कर के आया है। सीट नहीं मिली थी  इसलिए रात भर जाग कर आया है। मैंने कहा -"भाई इस तरह से सफर करने से तो अच्छा है एक दिन पहले आ जाते और कही रुक जाते या फिर एग्जाम सेंटर पास का ही चुनते ". उसने बताया की उसने एग्जाम सेंटर पास का ही चुना था लेकिन आया यहाँ का है। उसकी आर्थिक स्थिति इतनी अच्छी नहीं है की वो कहीं पैसे देकर रुक सके। मैंने कहा -"लेकिन इस हालत में तो आप एग्जाम भी अच्छे से नहीं दे पाएंगे। क्या फायदा इस तरह से धक्का खाने का इससे अच्छा तो एग्जाम देने नहीं आते। उसने कहा -" क्या करें एग्जाम तो देना ही है। क्या पता इस बार एग्जाम अच्छा ही हो जाये कैसे भी ". 

इंटरव्यू के दौरान नींद - कुछ ऐसा ही मेरे साथ भी हुआ था। उन दिनों मुझे अपने शहर से मुंबई जाना था एक इंटरव्यू के लिए और मेरे साथ और भी दोस्त थे जिनको वही वाला इंटरव्यू देना था जो मुझे देना था। हमारे शहर से मुंबई की दूरी लगभग तीन या चार घंटे की होती है। हम सब पैसे बचाने के लिए रात के बारह बजे की ट्रेन पकड़ते थे। तीन चार घंटे के सफर के बाद हम रेलवे स्टेशन पर ही फ्रेश होकर तुरंत एग्जाम सेंटर पहुंच जाते थे। एग्जाम देने के बाद तुरंत स्टेशन पहुंचकर वापसी की ट्रेन पकड़ लेते थे। इस तरह से शहर में रहने और खाने का खर्चा काफी हद तक बच जाता था। 

उस रात हम प्लेटफार्म पर ट्रेन का इंतज़ार कर रहे थे। उस रात ट्रेन अपने निर्धारित समय से बहुत लेट आयी। ट्रेन में बैठने के बाद मेरे सभी दोस्त जगह ढूंढकर सो गए लेकिन मुझे एक पत्रिका मिल गयी जो की पहले से ही सीट पर रखी हुई थी मैं वो पत्रिका देखने और पढ़ने लगा। वो पत्रिका देखते और पढ़ते हुए सुबह हो गयी और ट्रेन अपने निर्धारित जगह पर पहुंच गयी। हम स्टेशन पर ही फ्रेश होकर और नाश्ता करके इंटरव्यू वाले जगह पर चल पड़े।

वेटिंग वाली जगह पर बैठने के बाद मुझे बहुत नींद आने लगी और मैं नींद को काबू में रखने की कोशिश करता रहा। लेकिन कब तक काबू रखता नींद तो नींद होती है। मुझे पता ही नहीं चला की मैं कब कुर्सी पर बैठे हुए आगे की ओर झुककर सो गया। और मैं बैठा भी एकदम साइड वाली लाइन में था जहाँ इंटरव्यू वाले अफसर के स्टेज की तरफ जाने के लिए रास्ता था। 

जब मेरी नींद खुली तो देखा की इंटरव्यू लेने वाला अफसर स्टेज पर खड़ा है और मेरे दोस्त और बाकी लोग उसके स्वागत में खड़े हैं। मैं हड़बड़ा कर खड़ा हुआ और ये सोचकर भी थोड़ा परेशान हुआ की इस अफसर ने यहाँ से गुजरते हुए मुझे जरूर देखा होगा। पता नहीं क्या सोचेगा मेरे बारे में। 

नींद पूरी होना क्यों जरुरी है ?  मेरे अनुभव

मैंने अपने आसपास दोस्तों की तरफ देखा और सोचा की इनको तो जगाना चाहिए मुझे। खैर अब क्या फायदा। वो सब सावधान की मुद्रा में अफसर की तरफ देख रहे थे। मैं भी सावधान की मुद्रा में खड़े होकर उस अफसर की बात सुनने लगा।

बाद में वापस जाते समय मैंने जब दोस्तों को बोला की मुझे जगाया क्यों नहीं तो दोस्तों का कहना था की तुझे उस अफसर ने हमसे पहले ही सोते हुए देख लिया था। जब ट्रेन में सोने का मौका मिला था तो तुझे सो लेना चाहिए था। तब तो तू सोया नहीं। इसके बाद मैं भी क्या बोलता गलती मेरी ही थी मुझे सो लेना चाहिए था। अगर समय पर सो लिया होता तो गलत समय सोने की नौबत नहीं आती। 

रात में बस का सफर और गहरी नींद -ये बात स्कूल के दिनों की है। मैं स्काउट कैंप खत्म होने के बाद अपने सर और दोस्तों के साथ अपने शहर वापस लौट रहा था। रात काफी हो गयी थी। हम ट्रेन से उतरने के बाद बस में बैठ गए आगे के सफर के लिए। मेरे साथ जो यात्री बैठा था वो बहुत ज्यादा नींद में था। वैसे सोने की कोशिश तो मैं भी कर रहा था पर मुझे इतनी नींद नहीं आ रही थी। लेकिन मेरे साथ वाले यात्री को नींद बर्दाश्त ही नहीं हो रही थी। वो बार बार नींद में मुंह के बल मेरे घुटने से थोड़ा ऊपर गिर जा रहा था और उठने के बाद फिर से वैसा ही कर रहा था। ये बार बार हो रहा था। मुझे बहुत असहज महसूस हो रहा था। मुझे शरारत सूझी। उन दिनों मैं बहुत शरारत किया करता था। मैं उसको तिरछी नज़र से देखने लगा। जैसे ही वो नींद के प्रभाव में मेरे घुटनों के ऊपर गिरने को हुआ मैंने जल्दी से अपना पैर हटा लिया। उसका सिर सामने रखी मेरे सूटकेस से टकरा गया और तड़ाक की आवाज आयी। उसकी नींद ऐसे खुल गयी जैसे वो कभी सोया ही नहीं था। वो आँखें बड़ी करके और मुँह खोलकर मेरी तरफ देखने लगा। मैंने एक बार उसकी तरफ देखा। मुझे उसकी हालत पर बहुत हँसी आ रही थी। मैं दूसरी तरफ देखते हुए अपनी हंसी को काबू में करने की कोशिश करने लगा। वो आदमी कुछ नहीं बोला और वैसे ही देखते देखते और बस के साथ हिलते हिलते सो गया। उसके बाद वो दुबारा मेरे पैर पर नहीं गिरा। हो सकता है उसे नींद पूरी करने का समय ना मिल पाया हो। अगर उसे नींद पूरी करने का समय मिला भी होगा तो हो सकता है वो समय रहते सोया नहीं होगा। अगर पहले ही उसकी नींद पूरी हो गयी होती तो उसको ये सब नहीं झेलना पड़ता। 
नींद पूरी होना क्यों जरुरी है ?  मेरे अनुभव
एक कहावत है "जो सोवत है वो खोवत है" यानि जो सोता है वो खोता है। लेकिन जो नहीं सोता वो क्या पाता है ? नींद ना पूरी होने के कारण आपके व्यक्तिगत और प्रोफेशनल जीवन में आपके साथ क्या क्या हो सकता है ये आप मेरे बताये कुछ अनुभवों से समझ सकते हैं। सही से नींद ना पूरी होने का असर हमारे सेहत पर भी पड़ता है। आज की ज्यादातर जो बीमारियाँ है उनमें नींद ना पूरी होना एक महत्वपूर्ण कारण है। नींद ना होने के कारण मूड अच्छा नहीं रहता ,पाचन क्रिया और शरीर की अन्य क्रियाएं सही से नहीं होती है। धीरे धीरे आपका शरीर कई बिमारियों से घिरता चला जाता है। आप चिड़चिड़े हो सकते हैं। इसका आपके अन्य लोगों के साथ व्यवहार पर गलत असर पड़ता है। 

नींद के बारे में ये बातें सब को समझनी और माननी जरूरी है -
१ अगर सुबह जल्दी उठना है तो रात को जल्दी सोना जरूरी है। 
२ अगर सुबह की हवा और मस्त मौसम का आनंद लेना है तो रात को अच्छी नींद लेना जरूरी है। 
३ अगर सुबह जल्दी उठकर योग , कसरत और दौड़ना है तो रात को पूरी और अच्छी नींद लेना जरूरी है। 
४ खाने को अच्छे से पचाने के लिए भी सही समय पर और पूरी नींद लेना जरूरी है। 
५ भविष्य में होने वाली बड़ी बीमारियों से बचना है तो पूरी नींद लेना जरूरी है। 
६ दिन भर तरोताजा और अच्छे मूड में रहना है तो पूरी नींद लेना जरूरी है। 
७ पूरे दिन अच्छे काम करना है तो पूरी नींद लेना जरूरी है। 

अगर इन बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए ये कहूँ "बिना नींद पूरी किये जीवन को खुशी से जीने की ख्वाइश अधूरी है। खुश है वो इंसान जिसके पास दौलत ना सही अच्छा स्वास्थ्य , अच्छा मूड और जिसकी नींद पूरी है " तो ये गलत नहीं होगा। 
नींद पूरी होना क्यों जरुरी है ?  मेरे अनुभव

नींद का दूसरा विकल्प -अगर नींद के बारे में किसी से बात की जाये या अपने आसपास जागरूकता फ़ैलाने की कोशिश की जाये तो हमें ये सुनने को जरूर मिल सकता है की क्या करें हमारी जॉब ही ऐसी है की हमारी नींद नहीं पूरी होती है। क्या करें हमारे घर में ऐसे ही चलता है की हम जल्दी सो ही नहीं पाते। क्या करें ऐसा है क्या करें वैसा है। ये "क्या करें " वाला सवाल दूसरों पर थोपने के बजाय अगर सभी अपने स्तर पर सोचने लगें और उपाय निकालने की कोशिश करें तो कुछ तो हल निकल ही सकता है। ये "क्या करें " वाला सवाल लोगों का या सामने वाले का मुँह तो बंद कर सकता है लेकिन हल नहीं निकाल सकता है। आप चाहे जो भी कर रहे हैं या कितने भी मजबूर हैं नींद पूरी और अच्छी लेना जरुरी है। इसका कोई विकल्प नहीं है। 

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