हिम्मत रखो

हिम्मत रखो 

हिम्मत रखो

सबका समय आता है 

हिम्मत रखो 

बुरा वक़्त भी आता है और टल जाता है 

एकदम से बुरा कुछ भी नहीं होता है 

समय के साथ बदलाव होता है 

हिम्मत रखो 

जो होना है वो हो के रहता है 

चाहे डर लगे या बुरा लगे कोशिश करना अपना काम 

फल कहाँ किसी के बस में होता है 

हिम्मत रखो 

बस डरना नहीं है,झुकना नहीं है लेकिन आवेश में आकर किसी से कुछ कहना नहीं है और कुछ भी गलत करना नहीं है

सही को सही कहने में किसी तरह का संकोच करना नहीं है 

हिम्मत रखो 

बुरा और अच्छा वक़्त सबका आता है लेकिन डर सबको सताता है हमेशा झुकने पर मजबूर करता है 

कोशिश करो और हिम्मत रखो 

झुको नहीं ,डरो नहीं कोशिश करते रहो अंततः सब अच्छा होता है 

हिम्मत रखो  

ना जीत स्थायी होती है ना हार स्थायी होती है 

ना अच्छे दिन स्थायी होते हैं और ना ही बुरे दिन 

सब समय का खेल है जैसे रात और दिन 

झुको नहीं,डरो नहीं कोशिश करते रहो अंततः सब अच्छा होता है 

हिम्मत रखो 

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